केन्द्र सरकार अब टोल वसूलने की पूरी प्रणाली को बदलने जा रही है जिसमें आपके वाहन को किसी टोल बूथ पर पहले की तरह रुकने की जरुरत नहीं पड़ेगी। केन्द्र सरकार के परिवहन मंत्री नितिन गडकरी जी ने बताया है कि आने वाले एक साल के अन्दर व्यवस्था पूरे देश में लागू कर दी जायेगी जिससे कि टोल बूथ पर लगने वाला व्यर्थ समय व व्यर्थ झगडे ख़त्म होते नज़र आयेंगे और साथ साथ हाईवे पर लम्बी लम्बी वाहनों की अनावश्यक कतारें भी खत्म हो जायेंगी।आइये जानते है क्या है नया टोल कलेक्शन नियम
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नई टोल प्रणाली
लोक सभा में गुरुवार को देश के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी जी ने सबको बताया कि आने वाले एक साल के अंदर संपूर्ण देश के टोल बूथों पर से बैरियर का कार्य खत्म हो जायेगा जिससे कि वहां से गुजरने वाला वाहन अपनी उसी गति सीमा में रहकर टोल टैक्स देदेगा। इस परिवर्तन के बाद किसी भी वाहन को टोल बूथ पर रुकने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और यह अभी फिलाल देश के 10 स्थानों पर पायलट परिक्षण के रूप में शुरू भी कर दिया है आने वाले एक साल के अंदर यह नई टोल प्रणाली पूरे देश में लागू कर दी जायेगी।

नई आधुनिक तकनीक से टोल कलेक्शन
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जी ने बताया की इस टोल प्रणाली के लिए आटोमेटिक नंबर प्लेट पहचान (ANPR ) तथा फास्टटैग दोनों के माध्यम से टोल वसूला जायेगा जिसमें कि नंबर प्लेट रीड करने वाले उपकरण इतने आधुनिक और शक्तिशाली होंगे जो की वाहन की गति धीमी न होने पर भी उसका टोल वसूलने की क्षमता रखते हैं और यह प्रक्रिया के फास्टैग उपयोगकर्ता के खाते में से रकम वसूल ली जायेगी। यदि किसी वाहन पर फास्टटैग नहीं होता है या उसकी पहचान छिपाई जाती है तो उस परिस्थिति में वाहन स्वामी के खिलाफ ई -नोटिस या पेनल्टी लगायी जायेगी।
बिना फास्टटैग वालों को भी राहत
सरकार ने उनको भी राहत दी है जो की बिना फास्टटैग के दो गुनी रकम का भुगतान करते थे भारत में टोल प्लाज़ा को तेज़ और कैशलेस बनाने के लिए सरकार ने FASTag को अनिवार्य किया है। अगर कोई वाहन FASTag के बिना टोल प्लाज़ा पर पहुँचता है या उसका टैग ब्लैकलिस्ट/खाली बैलेंस में होता है, तो उसे सामान्य टोल शुल्क से 1.25 गुना (यानी 25% अधिक) राशि देनी पड़ती है। यह अतिरिक्त राशि इसलिए लगाई जाती है ताकि गाड़ियाँ कैश पेमेंट न करें, लाइन कम बने, और टोल कलेक्शन डिजिटल माध्यम से हो सके। FASTag न होने पर अतिरिक्त चार्ज लगाना एक तरह का पेनल्टी मैकेनिज़्म है, जो लोगों को डिजिटल पेमेंट अपनाने के लिए प्रेरित करता है। इससे समय बचता है, टोल पर भीड़ कम होती है और राष्ट्रीय राजमार्गों पर ट्रैफ़िक फ्लो स्मूथ रहता है।
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भारत सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर FASTag को अनिवार्य किया है ताकि टोल प्लाज़ा पर कैश पेमेंट कम हो, ट्रैफ़िक न रुके और डिजिटल टोलिंग सिस्टम तेज़ी से चले। जब कोई वाहन बिना FASTag या खराब/ब्लैकलिस्टेड FASTag के साथ टोल पर पहुँचता है, तो उसे सामान्य टोल शुल्क का 1.25 गुना (25% अतिरिक्त) भुगतान करना पड़ता है। यह अतिरिक्त राशि एक तरह का डिजिटल अनुपालन शुल्क है, जिसका उद्देश्य लोगों को FASTag का उपयोग अनिवार्य रूप से अपनाने के लिए प्रेरित करना है। इससे टोल कलेक्शन तेज़, पारदर्शी और ऑटोमैटिक होता है, साथ ही टोल प्लाज़ा पर लगने वाली भीड़ और समय दोनों कम होते हैं।
| स्थिति (Condition) | सामान्य टोल | FASTag न होने/ब्लैकलिस्ट होने पर | अतिरिक्त चार्ज | कुल देय राशि |
|---|---|---|---|---|
| FASTag सक्रिय और बैलेंस उपलब्ध | सामान्य टोल ही | लागू नहीं | 0% | सामान्य टोल |
| FASTag नहीं लगाया | ₹100 | 1.25X | +25% यानी ₹25 | ₹125 |
| FASTag ब्लैकलिस्ट/इंवैलिड | ₹100 | 1.25X | +25% यानी ₹25 | ₹125 |
| FASTag में बैलेंस 0 | ₹100 | 1.25X | +25% यानी ₹25 | ₹125 |
| FASTag डैमेज/स्कैन नहीं होता | ₹100 | 1.25X | +25% यानी ₹25 | ₹125 |